शासन से ठोकर बनाने की मिली हरी झंडी

6 करोड़ 70 लाख का प्रोजेक्ट स्वीकृत



रामगढ़, जिलाधिकारी बलिया हरि प्रताप शाही द्वारा गंगापुर व केहरपुर को गंगा कटान से बचाने तथा एनएच 31पर बढ़ रहे दबाव को कम करने के लिए अपने स्तर से ₹34 करोड़ 95 लाख 26 हजार की परियोजना बनाकर शासन को भेजा गया था, जिस पर निर्णय लेते हुए शासन द्वारा गंगापुर में करीब 6 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से कटान रोधी कार्य कराने की हरी झंडी मिल गई है जिससे गांववासियों में एक नई उम्मीद जग गई है,वहीं दूसरी ओर केहरपुर का प्रोजेक्ट शासन द्वारा फिर से निरस्त कर दिया गया है l


          बताते चलें कि एक जन आंदोलन के रूप में 22 जनवरी 2020 को कांग्रेस नेता विनोद सिंह के नेतृत्व में रामगढ़ ढाले पर एवं 24 फरवरी 2020 को सुघर छपरा में बाढ़ कटान की समस्या को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों के साथ धरना प्रदर्शन किया गया था। जिसको गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी बलिया हरि प्रताप शाही द्वारा गंगापुर व केहरपुर प्रोजेक्ट की स्वीकृति हेतु शासन को भेजा गया था ताकि बाढ़ आने से पूर्व ही एनएच 31 के साथ ही अन्य गांवों को बाढ़ कटान की जद में आने से बचाया जा सके । जिस पर शासन ने करीब 6 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से कटान रोधी कार्य कराने की स्वीकृति दे दी है, जिससे अब जल्द ही डेंजर जोन गंगापुर ढाले व सोनार टोला के सामने कटान रोधी कार्य शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है l



       बाढ़ विभाग के अधीक्षण अभियंता भानु प्रताप सिंह ने बताया कि शासन से दो ठोकर बनाने की हरी झंडी मिल गयी है जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उम्मीद है कि यह कार्य 30 जून से पहले पूर्ण हो जाये।


           इस परियोजना में बाढ़ सुरक्षा कार्य 26.900 किमी से 27.100 किमी के मध्य 3 करोड़ 60 लाख तथा 27.200 किमी से 27.400 किमी के मध्य 3 करोड़ 10 लाख की लागत से कराया जाएगा इसके तहत नदी के 5 मीटर भीतर से बालू भरकर बोरी डालने के उपरांत लोहे की जाली में बोल्डर भरकर डालना है जैसा कि पूर्व के वर्षों में नदी पर कटान रोधी कार्य में इस विधि का प्रयोग होता था। केहरपुर परियोजना के अस्वीकृत परियोजना के अस्वीकृत होने पर प्रमुख समाज सेवी व इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा है कि वह केहरपुर के परियोजना के लिए संघर्ष जारी रखेंगे जिससे बाढ़ कटान के समय में राष्ट्रीय राजमार्ग की मुश्किलों को कम करने के साथ ही अवशेष बचे गांव को गंगा की गोद मे जाने से बचाया जा सके।