मजदूरों की मौत, जिम्मेदार कौन ?


स देश में अगर सबसे ज्यादा मार सहकर जिन्दा रहने वाला कोई वर्ग है तो वो है मजदूर। वो मार चाहे भूख की हो या समाज में सर उठा कर जिंदा रहने की। 


     जी हां वही मजदूर जो दूसरों के हिस्से का वो सारा काम करते हैं जिसे समाज का अन्य तबका नहीँ कर सकता या नहीं करना चाहता। इनकी जरूरत और उसकी पूर्ति दोनो मे कोई खास अन्तर नहीं होता। अपने और अपने परिवार की आजीविका या रोजी रोटी का जुगाड़ इन्हे अपने और अपनों से दूर जाने को मजबूर करती हैं l और आज देखिए इस महामारी के रूप में कुदरत की मार भी सबसे ज्यादा कोई झेल रहा है तो वो यही वर्ग है।



पिछले डेढ़ महीने से ये विभिन्न शहरों/महानगरों से ये प्रवासी मजदूर अपने और अपने परिवार को बचाने की जुगत में भूखे प्यासे हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा करके जिस परेशानी से गुजर रहे हैं उसका दर्द शायद सिर्फ वही जान सकते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें देखकर रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं, लेकिन कलेजा तो तब फटता है जब चौतरफा मार झेलने के बाद भी एक मजदूर वक्त की मार से नहीं बच पाता और सड़क पर कुचल कर अपनी जान गवां बैठता है।



         28 मार्च महाराष्ट्र से गुजरात लौटते समय एक्सीडेंट मे चार मजदूरों की मौत। 29 मार्च हैदराबाद के गोलकुंडा मे ट्रक से कुचलकर सात मजदूरों की मौत,8 मई औरंगाबाद मे ट्रेन से कटकर 16 मजदूरों की मौत,16 मई औरैया मे सड़क हादसे मे 24 मजदूरों की मौत और भी न जाने कितने गुमनाम हादसें जो इन मजदूरों के जिंदगी मे अपनी किस्मत से लड़ते लड़ते ही काल बन गईं।


लेकिन प्रश्न ये उठता है कि इन सब का दोषी किसे माना जाए? 


     क्या इनके प्रान्त के उन गैरजिम्मेदार सरकार या अफसरों को जो इनकी बदहाली और पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार हैं? या उन राज्यों के सरकार और उनके तंत्र कों जो विपदा के इस माहौल में इन्हें अपना न सकें?या फिर सरकार द्वारा बिना किसी सुनियोजित तरीके से बिना तैयारी जल्दबाजी में लाकडाउन जैसे अप्रत्याशित निर्णय को, जिससे अचानक सबकुछ बंद होने से ऐसी हालात मे पहुंच गए? या फिर अचानक बिना बताए ट्रेनो और बसो के बंद हो जाने के कारण जिससे वो पैदल आने पर मजबूर हुएं? या फिर उन बेतरतीब चलते हुए वाहनों को जो खाली सड़क पर इनके वजूद को न देख सकीं? इसका उत्तर मिलना कठिन है,क्योंकि हमारे देश में मजदूरो के जीते जी उनकी बदहाली और मरने के बाद उनके लाशों पर सिर्फ एक चीज हो सकती है और वो है राजनीति l इसलिए मेरे ख्याल से उनके मौत का जिम्मेदार अगर कोई है तो शायद इनका नसीब ! 


कमलेश श्रीवास्त्तव